Sunday, 21 July 2019, 6:46 AM

कहानी

मधुमक्खी का छत्ताः एक अत्यंत प्रासंगिक कहानी

Updated on 19 February, 2014, 19:25
एक बार की बात है। एक चमकदार और रंगीन फूलों से भरे घास के मैदान और उद्यानों के बीचोबीच स्थित एक पुराने पेड़ पर मधुमक्खियों का एक बड़ा छत्ता स्थित था। छत्ते में एक रानी मधुमक्खी थी, जिसे कुछ वरिष्ठ मधुमक्खियों के साथ छत्ते के संचालन के लिए चुना गया... आगे पढ़े

एक अच्छा बेटा और एक बुरा बेटा

Updated on 19 February, 2014, 19:22
ज़रा कैन और हाबिल को देखिए। वे अब बड़े हो गए हैं। कैन एक किसान बन गया है। वह फल-सब्ज़ी और अनाज की खेती करता है। जबकि हाबिल एक चरवाहा बन गया। उसे भेड़ के छोटे-छोटे बच्चों, यानी मेम्नों की देखरेख करना बहुत अच्छा लगता है। धीरे-धीरे ये मेम्ने बड़े... आगे पढ़े

...और मिल गया टॉमी

Updated on 9 February, 2014, 13:11
टॉमी, रॉमी और सिली नाम के तीन पपी थे। तीनों अभी बहुत छोटे थे। उनकी मॉम रीबू उनका हर समय ख्याल रखती थी। एक टूटे हुए मकान के एक छोटे से कौने में उसने अपना घर बना रखा था। टॉमी और रॉमी उसमें अपनी बहन सिली के साथ खूब ऊधम... आगे पढ़े

ख़रगोश और प्यासे हाथी

Updated on 29 January, 2014, 20:01
प्राचीन काल में एक सुदूर क्षेत्र में एक सोते के निकट कुछ हाथी बहुत सुखी जीवन व्यतीत करते थे। एक साल वहां वर्षा न हुयी और सोते के पानी दिन प्रतिदिन कम होता गया यहां तक कि सोता सूख गया। हाथी सोच में पड़ गए। हाथियों के सरदार के आदेश... आगे पढ़े

कौआ और साँप

Updated on 29 January, 2014, 19:58
सुदूर क्षेत्र में स्थित एक जंगल में एक पेड़ पर एक कौआ रहता था। उसे ऐसा दुख था जिससे वह छुटकारानहीं पा रहा था। कौए के घोसले के निकट एक बड़ा सा साँप भी रहता था। कौआ जब भी अंडा देता और उससे बच्चा निकलता, दुष्ट साँप इस अवसर की... आगे पढ़े

फट रही है धरती!

Updated on 23 January, 2014, 12:55
बहुत समय पहले नंदन वन में चीकू खरगोश रहा करता था। उसे हमेशा प्रलय का डर सताता रहता। जैसे ही उसे खाली समय मिलता वो दुनिया के खत्म हो जाने के बारे में सोचने लगता। एक दिन वो बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर आराम कर रहा था। उसने पेड़... आगे पढ़े

परोपकार का फल

Updated on 19 January, 2014, 16:50
तेज हवा चल रही थी। एक बूढ़े आदमी के सिर से टोपी उड़ गई और एक पेड़ की टहनी पर लटक गई। रास्ते पर आते-जाते हर आदमी से वह बूढ़ा आदमी मदद मांगने लगा। दूर से आता हुआ आयुष यह सब देख रहा था। वह बूढ़े आदमी की मदद करना... आगे पढ़े

धूर्त गीदड़ और कर्पूरतिलक हाथी की कहानी

Updated on 15 January, 2014, 21:51
ब्रह्मवन में कर्पूरतिलक नामक हाथी था। उसको देखकर सब गीदड़ों ने सोचा,""यदि यह किसी तरह से मारा जाए तो उसकी देह से हमारा चार महीने का भोजन होगा।'' उसमें से एक बूढ़े गीदड़ ने इस बात की प्रतिज्ञा की -- मैं इसे बुद्धि के बल से मार दूँगा। फिर उस... आगे पढ़े

सोना की मस्ती

Updated on 12 January, 2014, 14:09
रोजाना की तरह चीनी मछली ने अपनी नन्हीं बेटी रूहू को हिदायत दी, जब तक मैं वापस लौटूं तुम नदी के इसी छोर में तैरती रहना, आगे खतरा है। रूहू ने पानी में छपछपाते हुए कहा- हां मां, मुझे पता है आगे खतरा है और मैं रास्ता भटक सकती हूं।... आगे पढ़े

जापान की शर्मनाक कहानी

Updated on 8 January, 2014, 23:19
1910 से 1945 के बीच जापानी सेना ने अपने कब्जे वाले देशों में लाखों महिलाओं से बलात्कार किया. इसके लिए बकायदा बलात्कार केंद्र बनाए गए थे. अफसोस यह है कि कुछ जापानी नेता अब इसे जायज ठहरा रहे हैं. ली ओक-सिओन अब 86 साल की हैं. उनकी पूरी जिंदगी जापानी सेना... आगे पढ़े

भारतीय नर्क

Updated on 1 January, 2014, 18:48
एक बार एक भारतीय व्यक्ति मरकर नर्क में पहुँचा, तो वहाँ उसने देखा कि प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी देश के नर्क में जाने की छूट है । उसने सोचा, चलो अमेरिकावासियों के नर्क में जाकर देखें, जब वह वहाँ पहुँचा तो द्वार पर पहरेदार से उसने पूछा - क्यों... आगे पढ़े

भटकती आत्मा किसी के इंतजार में

Updated on 1 January, 2014, 18:45
 मैदानी भागों में भी अगर किसी कल-कल बहती नदी के किनारे कोई छोटा सा गाँव हो, आस-पास में हरियाली ही हरियाली हो, शाम के समय गाय-बकरियों का झुंड इस नदी के किनारे के खाली भागों में छोटी-बड़ी झाड़ियों के बीच उग आई घासों को चर रहा हो, गायें रह-रहकर रंभा... आगे पढ़े

कहानी-अजीब इत्तफाक

Updated on 1 January, 2014, 18:32
लीला तिवानी अनिला और सुशील एक ही विषय की सह-अध्यापिकाएं थीं और स्वभाव मिलने के कारण पक्की सहेलियां भी। एक दिन अनिला ने सुशील को बताया कि कल 26 जनवरी को मेरे बहनोई सुशील का जन्मदिन है, इसलिए मुझे कल उनका जन्मदिन मनाने उनके घर जाना है। वह बोली, 'अरे मैं... आगे पढ़े

धोबी, धोबन, गधा और कुत्ते की कहानी

Updated on 29 December, 2013, 22:28
बनारस में कर्पूरपटक नामक धोबी रहता था। वह नवजवान अपने स्री के साथ बहुत काल तक विलास करके, सो गया। इसके बाद उसके घर के द्रव्य को चुराने के लिए चोर अंदर घुसा। उसके आँगन में एक गधा बँधा था और एक कुत्ता भी बैठा था। इतने में गधे ने... आगे पढ़े

सफेद सांप की कहानी

Updated on 27 December, 2013, 13:47
बहुत समय पहले ए मए सान पहाड़ में दो सांप थे, एक था सफेद सांप दूसरा था हरा सांप, दोनों सांप एक हजार साल की तपस्या के बाद दो सुन्दर औरत का रूप लेकर आज के सी हू सौन्दर्य झील के एक शहर में घोमने निकली। उन्होने अपना नाम पाए... आगे पढ़े

मुर्गी का दाम

Updated on 24 December, 2013, 13:40
डर के मारे किसान के मुंह से एक शब्द भी नहीं निकल पा रहा था। वहां इकट्ठी भीड़ में से कोई भी यह नहीं समझ पा रहा था कि किसान असल में कह क्या रहा है। बहुत समय पहले एक नगर में एक न्यायाधीश रहता था, जो किसी भी मामले में... आगे पढ़े

संतोष का धन

Updated on 6 December, 2013, 12:59
पंडित श्रीराम नाथ नगर के बाहर एक कुटिया में अपनी पत्नी के साथ रहते थे। एक दिन जब वे विद्यार्थियों को पढ़ाने जा रहे थे, उनकी पत्नी ने उनसे पूछा- आज भोजन क्या बनेगा? घर में एक मुट्ठी चावल ही है। पंडित जी ने पत्नी की ओर पल भर के... आगे पढ़े

मजेदार कहानी : अकल की दुकान

Updated on 5 December, 2013, 13:27
- स्मृति आदित्य एक था रौनक। जैसा नाम वैसा रूप। अकल में भी उसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता था। एक दिन उसने घर के बाहर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा- 'यहां अकल बिकती है।' उसका घर बीच बाजार में था। हर आने-जाने वाला वहां से जरूर गुजरता था। हर कोई बोर्ड देखता,... आगे पढ़े

उन्नाव के डौंडियाखेड़ा की पूरी कहानी

Updated on 20 October, 2013, 20:46
लखनऊ उन्नाव का डौंडियाखेड़ा गांव कल तक अपने आसपास बसे अन्य गांव की तरह ही एक साधारण सा गांव था. लेकिन जब से पुरातत्व विभाग ने डौंडियाखेड़ा किले में गड़े खजाने का पता लगाने के लिये खुदाई शुरु की, तब से पूरे देश के नजरें इस गांव और किलें पर आकर... आगे पढ़े

हे भगवान, मुझे एक टीवी बना दो

Updated on 24 September, 2013, 21:27
प्राथमिक पाठशाला की एक शिक्षिका ने अपने छात्रों को एक निबंध लिखने को कहा. विषय था "भगवान से आप क्या बनने का वरदान मांगेंगे" इस निबंध ने उस क्लास टीचर को इतना भावुक कर दिया कि रोते-रोते उस निबंध को लेकर वह घर आ गयी. पति ने रोने का कारण पूछा तो उसने... आगे पढ़े

विवशता न बने हिंदी दिवस ,दिल से करें हिंदी का सम्मान

Updated on 15 September, 2013, 17:27
हमारे देश की राजभाषा और राष्ट्रभाषा देश की लगभग आधी आबादी की मातृभाषा भी है । वैधानिक प्रावधानों के बाद भी केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग की अनिवार्यता को लागू नहीं किया जा सका है । कहने को राजभाषा के समर्थन में खूब नारे... आगे पढ़े

हिंदी दिवस : हिंदी में है विश्व भाषा बनने का सामर्थ्य

Updated on 14 September, 2013, 15:08
आज हिंदी दिवस है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया था तभी से 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाने की परंपरा चल निकली। आज हिंदी का स्वरूप काफी व्यापक हो चला है। साहित्य, फिल्म, कला, संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान, संचार, बाजार सभी क्षेत्रों में हिंदी... आगे पढ़े

एक और एक ग्यारह

Updated on 11 September, 2013, 11:40
बनगिरी के घने जंगल में एक हाथी ने उत्पात मचा रखा था। वह अपनी ताकत के नशे में चूर होने के कारण किसी को कुछ नहीं समझता था। बनगिरी में ही एक पेड़ पर टिक्कू चिडिया का छोटा-सा सुखी संसार था। टिक्कू अंडों पर बैठी नन्हे-नन्हे प्यारे बच्चों के निकलने... आगे पढ़े

बात का घाव

Updated on 31 August, 2013, 11:14
बहुत पुरानी बात है। एक लकड़हारे और शेर में दोस्ती थी। दोनों का मन एक दूसरे के बिना नहीं लगता था। शेर जंगल में रहता था और लकड़हारा गांव में। लकड़हारा लकडिया काटकर और उन्हें बेचकर अपना घर चला रहा था। सारे दिन वह जंगल में लकडिम्यां काटता था और... आगे पढ़े

रक्षा बंधन - ऐतिहासिक प्रसंग

Updated on 19 August, 2013, 22:40
राजपूत जब लड़ाई पर जाते थे तब महिलाएं उनको माथे पर कुमकुम तिलक लगाने के साथ साथ हाथ में रेशमी धागा भी बांधती थी। इस विश्वास के साथ कि यह धागा उन्हे विजयश्री के साथ वापस ले आएगा। राखी के साथ एक और ऐतिहासिक प्रसंग जुड़ा हुआ है।  मुगल काल के... आगे पढ़े

आमिर की पतंग

Updated on 9 August, 2013, 11:23
आमिर पतंग तो हर साल अलग-अलग मौकों पर उड़ाता रहता है, लेकिन 15 अगस्त पर उड़ाई जाने वाली उसकी पतंग हर किसी को कुछ ज्यादा ही पसंद आती है। खासकर उसकी तिरंगा पेपर से बनी पतंग तो अब उसके दोस्तों में खूब लोकप्रिय होने लगी है, जिस पर हर साल... आगे पढ़े

शिक्षाप्रद बाल कहानी : वफादारी का पुरस्कार

Updated on 1 July, 2013, 16:07
लाला पीतांबरलाल धरमपुरा रियासत के दीवान थे। पचास गांव की इस छोटी-सी रियासत के राजा शिवपालसिंह एक कर्तव्यनिष्ठ, दयालु और प्रजा के हित में काम करने वाले धर्म प्रिय राजा थे। दीवान पीतांबर लालजी का रियासत में बहुत सम्मान था क्योंकि वे न्याय प्रिय और जनता के सुख-दुख में सदा सहायता... आगे पढ़े

क्या ये जीवन है… ?

Updated on 25 June, 2013, 16:34
देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान, कितना बदल गया इंसान.. ये गाना बहुत सुना है और बचपन से सुना है.     जैसे जैसे बड़ी हुई इसे महसूस भी कर रही हूँ. अब शायद जीवन की आपा-धापी में इंसान के पास भावनाओं के लिए वक्त रह ही नहीं गया है.... आगे पढ़े

गर्व (लघु कथा )

Updated on 19 June, 2013, 15:46
      "माँ आज तुमने इतनी मार्मिक कविता सुनाई कि श्रोताओं की तालियां रुकने का नाम नहीं ले रही थीं. आज तुमने मेरा जन्मदिन का कार्यक्रम सफल कर दिया." आनन्द अपनी माँ को कार से उतारते हुए बोला. आनन्द की माँ प्यार से उसके सिर पर हाथ फिराते हुए बोलीं, "मेरा... आगे पढ़े